लंदन। पाकिस्तान और बांग्लादेश में हुए दो नए अध्ययनों के अनुसार बच्चों के जन्म के समय और उसके बाद गर्भनाल की सफाई से गरीब देशों में संक्रमण और नवजात बच्चों की मौत के मामलों में कमी आ सकती है।
नई दिल्ली। शादी का सीजन है। यदि आप किसी की शादी में जा रहे हैं तो सोचिए कि नवदंपत्ति को सबसे बढ़िया दिया जाने वाला स्वस्थ उपहार क्या हो सकता है। नवदंपत्ति के लिए सबसे उचित और प्यारा उपहार हो सकता है कंडोम (condoms) और पांच मिलीग्राम की फोलिक एसिड (folic acid) का पैकेट। यह समझदारी से भरा स्वस्थ्य उपहार है।
नई दिल्ली। पुरुष और महिलाएं दोनों ही मोटापे के शिकार हैं और उन्हें कई कोशिशों के बावजूद बच्चा पैदा नहीं हो रहा है तो वे अपना वजन घटाकर देखें। मोटापे की वजह से उनमें नपुंसकता और बांझपन की समस्या हो सकती है। पहली बार में वजन में कमी करने से इस समस्या से निजात पाया जा सकता है।
लंदन। भले ही चर्च अपनी ननों के लिए गर्भनिरोधक गोलियों के बिल्कुल खिलाफ है लेकिन एक नए अनुसंधान में ननों के लिए गर्भनिरोधक गोलियों की सलाह दी गई है ताकि उन्हें कैंसर होने का जोखिम कम हो।
नई दिल्ली। इमरजेंसी कंट्रासेप्टिव पिल्स (i pill) के प्रभाव-दुष्प्रभाव को जानने के लिए सरकार अध्ययन कराएगी। दिल्ली, मुंबई जैसे मेट्रो सिटी की स्कूली लड़कियों, किशोरियों व नाबालिग युवतियों द्वारा i pill
लंदन। अत्यधिक वजन वाली महिलाएं सावधान हो जाएं। मोटापे का असर आपके बच्चों पर भी पड़ता है। हालिया शोध के मुताबिक मोटापे से पीडि़त महिलाओं के बच्चे भी मोटे होते हैं।
नई दिल्ली। महानायक अमिताभ बच्चन की बहु ऐश्वर्या राय जब 38 साल की उम्र में सामान्य प्रसव (normal delivery) से बच्चे को जन्म दे सकती हैं, तो फिर दिल्ली व मुंबई जैसे महानगरों की महिलाएं क्यों नहीं?
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के एक मात्र प्रसूति अस्पताल दादादेव मातृ एवं शिशु अस्पताल में प्रसव के लिए बड़ी संख्या में आनी वाली गर्भवती महिलाएं मधुमेह व उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। महज 22 से 24 साल की pregnant women भी उच्च रक्तचाप की शिकार हो कर इलाज के लिए आ रही हैं। इसमें एक बड़ा कारण गर्भ ठहरने का तनाव है। प्रसव के बाद भी कई महिलाएं इससे उबर नहीं पाती हैं।
नई दिल्ली। बिना ओपन सर्ज़री किए एक महिला का गर्भाशय (uterus ) निकाला गया। 1700 ग्राम के गर्भाशय को दूरबीन प्रक्रिया के जरिए निकाला गया है। पीड़िता के गर्भाशय का ट्यूमर आठ माह के गर्भ के समान बड़ा था। महिला चलने-फिरने तक में असमर्थ थी।
नई दिल्ली। दिल्ली व मुंबई में औसतन केवल 44 प्रतिशत आईवीएफ विशेषज्ञ अपने मरीजों को मनोवैज्ञानिक परामर्श मुहैया कराते हैं जबकि सभी डॉक्टर यह जानते हैं कि उनके मरीज इस प्रक्रिया में बहुत ही ज्यादा तनाव से गुज़रते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्पष्ट सिफारिश है कि आईवीएफ (ivf treatment) के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया जाना बेहद जरूरी है