नई दिल्ली। दैनिक जागरण 'पहल' की महिला सशक्तिकरण और लिंग समानता को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई 'जेंडर बराबर' फोटोग्राफी प्रतियोगिता में 635 लोगों ने हिस्सा लिया।
नई दिल्ली। दिल्ली एडवरटाइजिंग क्लब (DAC) ने एडवरटाइजिंग, मार्केटिंग एवं मीडिया पर क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया। मीडिया सर्विस इनोशियन वर्ल्डवाइड के समूह निदेशक बी श्रीधर ने इसमें क्विज मास्टर की भूमिका अदा की। इस प्रतियोगिता में एमपीजी, इनोशियन वर्ल्ड वाइड की दो टीमें, हर्ड न्यूज मीडिया, जेसीडीकॉक्स, गोल्डमाइन, इंटर
भारतीय राजनीति में महिलाएं शुरू से ही हासिए पर रही हैं। आजादी के बाद इंदिरा गांधी जितनी सशक्त महिलाओं का प्रादुर्भाव दोबारा से देश की राजनीति में नहीं हो सका। ममता बनर्जी व जयललिता की जीत के साथ देश के चार राज्यों में महिला मुख्यमंत्री के होने ने एक बार फिर से देश की सत्ता में आधी आबादी के दबदबे के स्थापित होने का संकेत दिया है। वैसे इस स
जी करता है इस मोबाइल को फेंक दूं
यह कभी अकेला नहीं छोड़ता
हर जगह बज उठता है अक्सर बेवजह
लोग ढूंढ़कर नम्बर मिलाते हैं
मांगते हैं नौकरी, मुझे लिज्जत करते हुए
बैंक दिन में दसियों बार लोन की पेशकश करते हैं
बढ़ाते हैं खोखली हैसियत, चिढ़ाते हैं
मुझे नहीं चाहिए लोन
न ही मुझे खरीदना है कोई फ़्लैट
'मैंने शायद हजारों-हजार स्त्रियों का स्पर्श किया है लेकिन मेरे स्पर्श में वासना लेशमात्र भी नहीं रही। मैं कुछ स्त्रियों के साथ बिलकुल नग्नावस्था में लेटा हूं लेकिन वासना-तृप्ति के उद्देश्य से कभी नहीं। मेरा स्पर्श हमारे पारस्परिक उत्थान के निमित्त रहा है। यदि कोई ऐसी स्त्री हो जिसने इसके विपरीत कुछ अनुभव किए हों, तो मैं सचमुच चाहता हू
आज से कोई 36-37 साल पहले जब मैंने पत्रकारिता शुरू ही की थी, मेरी नजरों में एक ऐसा लेख आया जिसे पढ़कर मैं स्तब्ध रह गया। यह लेख हिमालय के सुदूरवर्ती इलाकों में रहने वाली एक ऐसी जाति के बारे में था, जिसमें एक ही औरत के तीन-चार पति तक हो सकते थे। लेख में बताया गया था कि इस जाति या कबीले में शताब्दियों से यह रिवाज रहा है कि बड़ा भाई शादी करता है और उसकी पत्नी उसके सारे
दोस्तो, जैसा कि आप जानते ही हैं कि आपके www.aadhiabadi.com वेबपोर्टल को लांच हुए एक साल हो चुका है। 8 मार्च 2010 को महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली महिला आयोग की चेयरपर्सन बरखा सिंह ने इसे लांच किया था। हमारा प्रयास महिलाओं के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने का था, जो उन्हें सशक्त करे...
मैं सोचती हूँ एक वक्त ऐसा भी आएगा, जब आदमी औरत के पीछे खड़ा नजर आएगा। ट्रक पर सामान लादने से लेकर हाथी का महावत बनने तक हर काम में औरतों का प्रभुत्व होना चाहिए। आदमी को घर में रुककर खाना बनाना चाहिए और जब स्त्रियाँ काम से लौटें तो उन्हें गोद में बच्चे लिए उनके लिए घर के दरवाजे खोलने चाहिए।'
जीने के अधिकार से भी वंचित नारी ने अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर पहला कदम उस समय रखा, जब लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 1894 में न्यूजीलैण्ड ने विश्व के प्रथम राष्ट्र के रूप में महिलाओं को वोट का अधिकार दिया। वोट का अधिकार प्राप्त करने पर न्यूजीलैण्ड की महिलाओं को समर्थन कम और विरोध का सामना अधिक करना पड़ा। दूसरी ओर, यह सोच भी सच्चाई से दूर नहीं थी कि अब विश्व की आधी आबादी क
स्त्रियों पर बढ़ता अत्याचार हमारे समाचार माध्यमों का एक आम हिस्सा हो गया है, लेकिन यह जानकारी लोगों को कम ही है कि जितनी स्त्रियाँ बलात्कार, दहेज और अन्य मानसिक व शारीरिक अत्याचारों से सताई जाती हैं, उनसे कई सौ गुना ज्यादा तो जन्म लेने से पहले ही मार दी जाती हैं। वाणी और विचार में स्त्री को देवी का दर्जा देने वाले किंतु व्यवहार में स्त्री के प्रति हर स्तर पर घोर भ