नई दिल्ली। घर में शौचालय की सुविधा न होने पर शादी के कुछ ही दिनों के भीतर अपना ससुराल छोड़ चुकी मध्य प्रदेश की अनीता बाई नर्रे को पांच लाख रुपए के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अनीता को उसके साहसी फैसले के लिए पुरस्कृत किया गया है। उसके विरोध करने के बाद ग्रामीणों ने शौचालय की कमी के मुद्दे को जोर शोर से उठाया।
नई दिल्ली। भईया, मैं भी पापा का नाम रोशन करूंगी- समाज में बेटे-बेटी के अंतर की समझ न होते हुए भी एक छोटी बच्ची के मन ने यह संकल्प लिया और जब वह बड़ी हुई तो उसने सचमुच अपने पापा का नाम रोशन कर दिया। बचपन में अपने भईया से कही वह बात उसे आज भी याद थी और उसने बचपन के उस क्षण को अपने कैमरे से साकार कर दिया। बचपन की सोच युवावस्था में साकार हुई...और
नई दिल्ली। गॉसिप हो या मोटरसाइकिल राइडिंग या हो कमरतोड़ मेहनत से हजारों फीट की ऊंचाई पर गैस का सिलेंडर पहुंचाना- हर रूप में स्त्री आत्मविश्वास से लबरेज है। 'जागरण पहल' द्वारा लिंग समानता को बढ़ावा देने के लिए आयोजित 'जेंडर बराबर' फोटोग्राफी प्रतियोगिता में अलग-अलग भूमिकाओं में स्त्री का हर रंग दिखा। दिल्ली हाट में लगाए गए फोटो प्रदर्शनी में शामिल जजों के पैनल द्वार
नई दिल्ली। देश भर में कन्या भ्रूण हत्या की वजह से उत्पन्न हो रहे लिंग अनुपात में भारी अंतर को पाटने के लिए देश की बेटियां अपने हौसले से समाज को सोचने पर मजबूर कर रही हैं। 'जागरण पहल' द्वारा लिंग समानता को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई 'जेंडर बराबर' फोटोग्राफी प्रतियोगिता में भाग लेने वाले फोटोग्राफरों की कैमरे ने बेटियों के बुलंद हौसले को कैद कर सम
नई दिल्ली। कुंवारी लड़की और विधवा औरत भी मां बन सकती है। देश का दत्तक कानून उन्हें गोद लेने की इजाजत देता है, लेकिन कानून की जटिलता और इस बारे में अज्ञानता की वजह से जरूरतमंद महिलाएं इस कानून का लाभ नहीं ले पाती हैं। प्रगति मैदान में लगे विश्व पुस्तक मेले में सुधाली पब्लिशर्स के स्टॉल मे
मप्र सरकार की पहल। ग्वालियर के किले की खूबसूरती की कहानी आने वाले समय मे लेडी गाइड की जुबानी सुनने मिलेगी। टूरिज्म बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार यह पहल कर चुकी है। इसकी शुरुआत कान्हा टाइगर रिजर्व से हो गई है। अब इसे ग्वालियर समेत प्रदेश भर में शुरू किया जाएगा। इससे महिलाओं को रोजगार के नए अवसर तो मिलेंगे ही। साथ ही पर्यटकों को भी यह अनुभव रोचक लगेगा।
नई दिल्ली। जागरण पहल ने महिला सशक्तिकरण और लिंग समानता को बढ़ावा देने के लिए 'जेंडर बराबर' फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन किया है। कन्या शिशु (girl child) विषय पर आधिारित इस फोटो प्रतियोगिता में देश भर के लोग हिस्सा ले सकते हैं और 18 फरवरी तक अपनी प्रविष्ठियां भेज सकते हैं।
नई दिल्ली। कहते हैं महिलाएं यदि चाहें तो किसी भी असंभव को संभव कर सकती हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( Aiims) के ट्रामा सेंटर में चार महिलाओं ने मिलकर अपने घर के कर्ता की लौ से तीन घरों को रौशन कर दिया। दिल्ली की सडक पर गाडी की चपेट में आए एक 64 वर्षीय बुजुर्ग को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था, ऐसे में उनकी पत्नी, बेटी और दो बहनों ने निर्णय लिया क
नई दिल्ली। लीवर सिरोसिस और थाइरोटोविसकोसिस से पीडि़त एक गरीब मरीज की जान बचाने के लिए 19 लाख रुपए की जरूरत थी। न तो उसके पास पैसे थे और न ही उसके पास वक्त। ऐसे में अपोलो अस्पताल ने निर्णय लिया कि उस मरीज की जान बचाने के लिए उसकी सर्ज़री नि:शुल्क की जाए। सतपाल सिंह नामक व्यक्ति की जिंदगी बचाने के लिए लीवर ट्रांस्प्लांट सर्ज़री मुफ़्त में की गई। ऐसा देश के चिकित्सीय इ
Kishanganj. The Delhi based Aligarh Muslim University Coordination Committee (AMUCC) Delhi offered a grand reception to AMU Vice Chancellor Prof P K Abdul Azis on the agreement day of proposed AMU Centre in Kishanganj.
लंदन। पाकिस्तान से ब्रिटेन आकर बसने वाले मुसलमानों की अच्छी खासी तादाद है। पाकिस्तानी मूल के इन मुस्लिम ब्रिटेनवासियों में ऐसे बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा है जिनमें जन्म से ही आनुवांशिक विकार हैं। एक शोध के मुताबिक ब्रिटेन में आम लोगों की तुलना में पाकिस्तानी मूल के मुस्लिमों के बच्चों में आनुवांशिक विकार होने की आशंका 13 गुना ज्यादा है। ऐसा मुस्लिमों में
सीत मिश्रा। मनमोहन सिंह सरकार की कैबिनेट ने हिंदू विवाह कानून में संशोधन को अंतत: मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के चलते अब तलाक लेने की प्रक्रिया और आसान हो जाएगी। इसके तहत अब जजों के लिए तलाक का फैसला देने से पहले 18 माह की पुनर्विचार अवधि की बाध्यता भी खत्म हो जाएगी। पति-पत्नी की तलाक के सुनवाई के दौरान अगर जज को लगता है कि शादी बचाना मुश्किल है तो वह तलाक का फैसल
नई दिल्ली। आजादी के करीब 65 साल बाद भी देश में फैले गरीबी के जाल और अन्य देशों की तुलना में यहां की सस्ती चिकित्सा सुविधाओं की वजह से दूसरे देशों के उन नागरिकों का संतान पाने का सपना भारत में सरोगेसी (surrogacy) के माध्यम से आसानी से पूरा हो रहा है जो अपने देश में रहते हुए इस सुख से वंच
नई दिल्ली। समाज में महिलाओं के साथ भेदभाव संपित्त पर अधिकार से पैदा हुआ। पितृसत्तात्मक समाज का निर्माण भी कालक्रम में संपित्त पर अधिकार स्थापित करने को लेकर ही हुआ। पुरुषों के लिए यह जरूरी था कि उनकी संपित्त पर उनके ही खून का अधिकार हो, जिसको लेकर स्त्री की 'यौनिकता' (sexuality) और उसके
नई दिल्ली। लिंग चयन (sex determination) की प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए देश के कई हिस्से में प्रयुक्त हो रहे साइलेंट ऑब्जर्वर व एक्टिव ट्रेकर के प्रयोग को विशेषज्ञों ने सराहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भ्रूण हत्या पर रोक लगेगी, लिंगानुपात में वृद्ध होगी, और लिंग चयन जांच क़ानून को क्रियान्वित कराने में मदद मिलेगी।
मुस्लिम औरतों को कुरआन शरीफ में मिले हक व अधिकार हमारे निजी क़ानून में नज़र नही आते है, जिससे मुस्लिम महिलाएं अपने समुदाय के भीतर ही शोशण की शिकार होने को मजबूर है। पवित्र ग्रंथ कुरआन शरीफ में करीब 150 बार महिलाओं के हक व अधिकार के बारे में जिक्र किया गया है, मगर अफ़सोस है कि हमारा भारतीय मुस्लिम समाज उसका पालन नहीं कर रहा है।
नई दिल्ली। मंच पर छोटे-छोटे बच्चों की रंगारंग प्रस्तुति। एक के बाद एक बच्चों ने मंच पर ऐसा समय बांधा कि हर कोई देख़ता रह गया। फिर मौका आया इन छोटे बच्चों की प्रतिभा को तराशने वाले शिक्षकों सहित अपने-अपने क्षेत्रों में नाम कमाने वाली हस्तियों को सम्मानित करने का। समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उल्लेखनीय भूमिका अदा करने वाले इन प्रबुद्ध लोगों को उदय सम्मान
नई दिल्ली। चक दे इंडिया फेम सागरिका घाटगे का कहना है कि भारत में आभूषण महिलाओं के लिए शुभ माने जाते हैं। आभूषणों को न केवल प्रशंसा के लिए, बल्कि आकिस्मक समय में सुरक्षा के लिए भी रखा जाता है। धनतेरस जैसे त्यौहार में आभूषणों की मांग और बढ जाती हैं। जिन महिलाओं के पास आभूषण हैं भी वो इस दिन ज्वेलरी की खरीददारी को विशेष रूप से शुभ समझती हैं। सागरिका एसएलजी
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस के नजदीक जवाहर नगर स्थित सरस्वती निवास छात्रावास में छात्राओं के लिए हाईटेक जिम खुल गया है। इस जिम में छात्राओं के लिए अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई है। छात्रावास के निदेशक महेश शर्मा ने बताया कि विकलांग व आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं के लिए जिम में विशेष रियायत दी जाएगी। लेकिन ये छात्राएं ऐसी होनी चाहिए जो पढ़ने में
नई दिल्ली। देशभर में पत्रकारों पर हो रहे हमले के विरोध में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे) व दिल्ली पत्रकार संघ के बैनर तले सैकड़ों पत्रकारों ने शनिवार को जन्तर-मन्तर पर धरना दिया। बाद में एक प्रतिनिधिमण्डल ने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून बनाने की मांग से सम्बन्धित एक ज्ञापन
नई दिल्ली। दैनिक जागरण 'पहल' की महिला सशक्तिकरण और लिंग समानता को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई 'जेंडर बराबर' फोटोग्राफी प्रतियोगिता में 635 लोगों ने हिस्सा लिया।
नई दिल्ली। दिल्ली एडवरटाइजिंग क्लब (DAC) ने एडवरटाइजिंग, मार्केटिंग एवं मीडिया पर क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया। मीडिया सर्विस इनोशियन वर्ल्डवाइड के समूह निदेशक बी श्रीधर ने इसमें क्विज मास्टर की भूमिका अदा की। इस प्रतियोगिता में एमपीजी, इनोशियन वर्ल्ड वाइड की दो टीमें, हर्ड न्यूज मीडिया, जेसीडीकॉक्स, गोल्डमाइन, इंटर
भारतीय राजनीति में महिलाएं शुरू से ही हासिए पर रही हैं। आजादी के बाद इंदिरा गांधी जितनी सशक्त महिलाओं का प्रादुर्भाव दोबारा से देश की राजनीति में नहीं हो सका। ममता बनर्जी व जयललिता की जीत के साथ देश के चार राज्यों में महिला मुख्यमंत्री के होने ने एक बार फिर से देश की सत्ता में आधी आबादी के दबदबे के स्थापित होने का संकेत दिया है। वैसे इस स
जी करता है इस मोबाइल को फेंक दूं
यह कभी अकेला नहीं छोड़ता
हर जगह बज उठता है अक्सर बेवजह
लोग ढूंढ़कर नम्बर मिलाते हैं
मांगते हैं नौकरी, मुझे लिज्जत करते हुए
बैंक दिन में दसियों बार लोन की पेशकश करते हैं
बढ़ाते हैं खोखली हैसियत, चिढ़ाते हैं
मुझे नहीं चाहिए लोन
न ही मुझे खरीदना है कोई फ़्लैट
'मैंने शायद हजारों-हजार स्त्रियों का स्पर्श किया है लेकिन मेरे स्पर्श में वासना लेशमात्र भी नहीं रही। मैं कुछ स्त्रियों के साथ बिलकुल नग्नावस्था में लेटा हूं लेकिन वासना-तृप्ति के उद्देश्य से कभी नहीं। मेरा स्पर्श हमारे पारस्परिक उत्थान के निमित्त रहा है। यदि कोई ऐसी स्त्री हो जिसने इसके विपरीत कुछ अनुभव किए हों, तो मैं सचमुच चाहता हू
आज से कोई 36-37 साल पहले जब मैंने पत्रकारिता शुरू ही की थी, मेरी नजरों में एक ऐसा लेख आया जिसे पढ़कर मैं स्तब्ध रह गया। यह लेख हिमालय के सुदूरवर्ती इलाकों में रहने वाली एक ऐसी जाति के बारे में था, जिसमें एक ही औरत के तीन-चार पति तक हो सकते थे। लेख में बताया गया था कि इस जाति या कबीले में शताब्दियों से यह रिवाज रहा है कि बड़ा भाई शादी करता है और उसकी पत्नी उसके सारे
दोस्तो, जैसा कि आप जानते ही हैं कि आपके www.aadhiabadi.com वेबपोर्टल को लांच हुए एक साल हो चुका है। 8 मार्च 2010 को महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली महिला आयोग की चेयरपर्सन बरखा सिंह ने इसे लांच किया था। हमारा प्रयास महिलाओं के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने का था, जो उन्हें सशक्त करे...
मैं सोचती हूँ एक वक्त ऐसा भी आएगा, जब आदमी औरत के पीछे खड़ा नजर आएगा। ट्रक पर सामान लादने से लेकर हाथी का महावत बनने तक हर काम में औरतों का प्रभुत्व होना चाहिए। आदमी को घर में रुककर खाना बनाना चाहिए और जब स्त्रियाँ काम से लौटें तो उन्हें गोद में बच्चे लिए उनके लिए घर के दरवाजे खोलने चाहिए।'
जीने के अधिकार से भी वंचित नारी ने अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर पहला कदम उस समय रखा, जब लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 1894 में न्यूजीलैण्ड ने विश्व के प्रथम राष्ट्र के रूप में महिलाओं को वोट का अधिकार दिया। वोट का अधिकार प्राप्त करने पर न्यूजीलैण्ड की महिलाओं को समर्थन कम और विरोध का सामना अधिक करना पड़ा। दूसरी ओर, यह सोच भी सच्चाई से दूर नहीं थी कि अब विश्व की आधी आबादी क
स्त्रियों पर बढ़ता अत्याचार हमारे समाचार माध्यमों का एक आम हिस्सा हो गया है, लेकिन यह जानकारी लोगों को कम ही है कि जितनी स्त्रियाँ बलात्कार, दहेज और अन्य मानसिक व शारीरिक अत्याचारों से सताई जाती हैं, उनसे कई सौ गुना ज्यादा तो जन्म लेने से पहले ही मार दी जाती हैं। वाणी और विचार में स्त्री को देवी का दर्जा देने वाले किंतु व्यवहार में स्त्री के प्रति हर स्तर पर घोर भ
इंदौर । आनंद के सहज, सरल और निर्मल ज्ञान की पराकाष्ठा यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में बुधवार दोपहर देखने को मिली। उन्होंने कुशाग्र बुद्धि वाले 236 बच्चों का जीवन संवारने में खास भूमिका निभाई। सार्थक संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘प्रतियोगिता का संघर्ष, प्रेरणा और सफलता’ पर बातचीत करने आए थे।
जिन क्षेत्रों को कभी पुरुष वर्चस्व वाला माना जाता था आज लगभग हर उस क्षेत्र में महिलाओं का न सिर्फ दखल है बल्कि दबदबा कायम होता जा रहा है । कानून की दुनिया भी इससे अलग नहीं है। न्यायमूर्ति एम.
15 दिसंबर, लौह पुरुष की पुण्य तिथि पर विशेष। आजादी के बाद भी सैकड़ों रियासतों के रूप में बंटे भारत को अखंड भारत बनाने में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अपने बहादुरी भरे कार्यों और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर लौह पुरुष का दर्जा हासिल करने वाले पटेल की स्वतंत
माधुरी दीक्षित पिछले दिनों खाना बनाने की वजह से चर्चा में रहीं। उन्होंने एक चैनल के कुकिंग शो के एक एपीसोड में हिस्सा लिया था। करोड़ों प्रशंसकों की चहेती हीरोइन माधुरी अब अभिनय की दुनिया से अलग हैं, फिर वे लोगों की नजरों में बसी हैं। कभी फिल्मफेयर अवार्ड फंक्शन में डांस करके तो कभी डांस बेस्ड रियलिटी शो झलक दिखला जा की जज बनकर। वे आज भी तैयार हैं अभिनय की दुनिया
नई दिल्ली। इस बार उन्होंने कंघी से निशाना लगाया। लेकिन उनके रिवाल्वर की तरह ही सटीक बैठा। स्टील सिटी जमशेदपुर के लोगों ने कभी अपने `हीरो´ रहे पूर्व एसपी डॉ.
हरेक क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती सफलता आज कोई नई बात नहीं रही, बल्कि अब तो वे सफलता के लिए समय व उम्र के फासले को भी फान्दती जा रही हैं। वह जमाना बीत चुका है, जब महिलाओं को पुरूष प्रधान समाज में अपना मुकाम हासिल करने के लिए आधी से ज्यादा उम्र संघर्ष में बितानी पड़ती थी। महिलाएं बेहद कम उम्र में सफलता की सीढि़यां चढ़ने लगी हैं। ऐसी ही एक युवा और टैलेंटेड महिला हैं
भारत के मॉडलिंग जगत में नया उभरता नाम है लक्ष्मी राणा। मॉडलिंग की दुनिया में 19 साल की बेहद कम उम्र लक्ष्मी ने अपना कॅरिअर शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे लक्ष्मी मॉडलिंग जगत की नामी-गिरामी हस्तियों की नज़र में आने लगी। लक्ष्मी के मॉडलिंग कॅरिअर में स्थिरता आई वर्ष 2001 के इण्डिया फैशन वीक से। इसके बाद लक्ष्मी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
भारतीय महिलाएं न केवल अपने देश में बल्कि सात समंदर पार अमेरिका में भी अपने प्रतिभा का लोह मनवा रही हैं। बड़े कंपनियों के सीईओ के रूप में इन महिलाओं ने सफलता की जो कहानी लिखी है, वह समाज के लिए प्रेरक है। वित्तीय क्षेत्र से लेकर बड़ी-बड़ी कंपनियों की सीईओ महिलाएं हैं और अपनी कंपनी के बल पर वह देश की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रही हैं।
मुम्बई। वक्त के साथ बदलना तो बहुत आसां था, मुझसे हर लम्हा मुखातिब रही गैरत मेरी, अमीर क़ज़लबाश का यह शैर शायद शगुफ़्ता रफीक जैसी ही उन कई महिलाओं के लिए लिखा गया, जिन्होंने जिन्दगी से समझौता करने की बजाय अपनी तकदीर को ही बदल दिया।
दुनिया की शीर्ष 100 प्रेरक महिलाओं में जिन पांच भारतीय महिलाओं को जगह मिली है उनमें उत्तरप्रदेश के बांदा की गुलाबी गैंग का नेतृत्व करने वाली सम्पत पाल देवी भी शुमार हैं। सम्पत घरेलू हिंसा का विरोध करती हैं। महिला अधिकारों की आवाज उठाने पर उत्तर प्रदेश की पुलिस ने सम्पत को नक्सली करार देकर जेल भेज दिया था।आज संपत पाल के नाम से पत्नियों पर जुल्म करने वाले