लालन पालन

आपके बच्‍चों की सफलता उनके नाम में छिपा है

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सिडनी। कहते हैं, नाम में क्या रखा है? किसी भी नाम से पुकारो, क्या फर्क पड़ता है? लेकिन अब ऐसा सोचना बंद कर दीजिए क्योंकि फर्क पड़ता है। जिंदगी से जुड़े हर पहलू पर इसका गहरा असर होता है। ऐसा पेशेवर जिंदगी में भी होता है। अब वैज्ञानिकों ने भी इसकी पुष्टि कर दी है।

मोटापे, मधुमेह से लड़ता है स्तनपान

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लंदन। मां बनने जा रही महिलाएं ध्यान दें। स्तनपान (breastfeeding) उनके शिशु को आगे जाकर न केवल मोटापे से दूर रखेगा बल्कि मधुमेह का जोखिम भी कम करेगा। डेनमार्क में कोपनहेगन विश्वविद्यालय के जीवन विज्ञान संकाय के शोधकर्ताओं ने पाया कि स्तनपान करने वाले बच्चों का विकास बाहर का दूध पीने वालों से अलग होता है। इससे भविष्य में उन्हें कई लाभ मिलते हैं।

स्तनपान से अल्जाइमर-कैंसर तक से हो सकती है सुरक्षा

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लंदन। मां का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार-यह बात जगजाहिर है, लेकिन विशेषज्ञों ने अब कहा है कि स्तनपान करने वाले शिशु को भविष्य में अल्जाइमर से लेकर कैंसर तक होने का खतरा टल सकता है।

क्रेच में पलेंगे बच्‍चे तो होगी उन्‍हें दिल की बीमारी

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लंदन। कामकाजी माताओं को सावधान हो जाना चाहिए। क्योंकि मनोचिकित्सकों ने दावा किया है कि छोटे बच्चों को क्रैच में रखने की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसके चलते बच्चों में बड़े होने पर दिल की बीमारी का खतरा पैदा हो जाता है क्योंकि माता पिता से दूर रहने पर तनाव का स्तर बढ़ जाता है।
 

पति-पत्‍नी में हो यदि प्‍यार तो बच्‍चा रहेगा नशे से दूर

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बच्चों का व्यवहार काफी हद तक उनके साथ अभिभावकों के रवैये पर निर्भर करता है। लंदन में हुए एक शोध के अनुसार, बच्चों के साथ अभिभावकों के बुरे बर्ताव से 16 साल की उम्र में उनमें शराब पीने की आशंका आठ गुना अधिक होती है, जबकि 34 साल की उम्र के बाद शराब पीने की आशंका दोगुनी बढ़ जाती है।

लोरी के बोल बडे अनमोल

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मातृ दिवस की शुभकामनाएं व्याकरण के सभी नियमों और शब्दार्थों से अनजान, दीन-दुनिया से बेखबर जब कोई बच्चा लोरी के रूप में मां के कंठ से निकली दिल की आवाज सुनता है तो सो ही जाता है। इन शब्दों का मतलब भले ही उसे न पता हो, लेकिन फिर भी वह मां के भावों को

वाया फ्रिज मां का दूध पहुंचता है बच्चे तक!

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नई दिल्ली। मेट्रो शहरों में मां के स्तन का दूध नवजात के मुंह में सीधा पहुंचने की जगह वाया बोतल या फ्रिज पहुंच रहा है। कामकाजी और अपने फिजिकल फिटनेस के प्रति सतर्क महिलाएं बच्चे को सीधा स्तनपान कराने की जगह अपना दूध निकालकर बोतल के जरिए उन्हें पिलाती हैं। यही नहीं ऑफिस या बिजनस टूर की वजह से कई दिनों तक घर से बाहर जाने से पहले वह अपने स्‍तन से काफी सारा दूध नि

घर में बने भोजन में पोषक तत्व कम फील गुड ज्यादा

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नई दिल्ली बाजार में बच्चों के लिए हेल्थ फूड उत्पादों की भरमार के बीच भी पोषण विशेषज्ञ अन्त में अब तक यही कहते हैं कि बच्चों को घर में मां के हाथ के बने चावल, रोटी, दाल, सब्जी से बेहतर पोषण और कहीं नहीं मिल सकता। इतना ही नहीं, वे हेल्थ उत्पादों की विश्वसनीयता पर सवाल भी उठाते हैं। लेकिन

मातृत्व के हर क्षण का लें आनंद : जोली

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हॉलीवुड सुपरस्टार एंजेलिना जोली ने नई माँओं से अपील की है कि उन्हें मातृत्व के हर पल का आनंद उठाना चाहिए क्योंकि यह बहुत जल्द बीत जाएगा।

नाश्ते में हो मजा, तो बच्चे नहीं करेंगे मना

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पढ़ाई लिखाई हो या खेलकूद, आज बच्चों के लिए हर क्षेत्र में स्ट्रेस बढ़ता ही जा रहा है। व्यायाम के साथ-साथ आज उन्हें एक ऐसे पौष्टिक आहार की आवश्यकता है जो शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क के विकास में भी लाभप्रद हो। फास्टफूड के बढ़ते प्रचलन के साथ-साथ आज बच्चे मुख्य आहार से मुंह मोड़ते जा रहे हैं।

साज सज्जा

घर की खूबसूरती सुन्दर बगीचे से

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एक सुन्दर व स्वच्छ गार्डन घर की खूबसूरती में चार चान्द लगा देता है। आजकल अधिकत्तर लोग धर के प्र्रवेश द्वार पर ही गार्डन बनाना पसन्द करते है। इसलिए अब धर की साज सज्जा के साथ-साथ बड़े पैमाने पर बगीचे की सुन्दरता और खुबसूरती पर घ्यान दिया जाता है। आजकल की दौड़भाग की जिन्दगी में वो कुछ क्षण अपने परिवार के के साथ गार्डन में बैठकर एक कप चाय पीता है। पूरे दिन की थकान के ब

पालतू जानवरों का स्थान ले रही हैं मछलियां

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आजकल लोगों ने कुत्ते-बिल्ली और तोता-मैना जैसे अपने `परम्परागत्´ व पसन्दीदा पालतू जानवरों के स्थान पर मछलियों को पालना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि अब घरों, दफ्तरों, विद्यालयों, अस्पतालों और होटलों आदि में मछलियों को रखने के लिए `ऐक्वेरियम´ का चलन तेजी से बढ़ने लगा ह

गर्मी से राहत दिलाएगा घर का इंटीरियर

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गर्मी की तपती धूप जहां सबको बेहाल करने वाली है, वहीं अगर घर को मौसम के हिसाब से व्यवस्थित किया जाए तो गर्मी से राहत मिल सकती है। गर्मी में घर के इंटीरियर पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। इसमें रंगों से खेलकर, फ़्लोर, वॉलपेंट, पर्दे आदि से घर को कूल रखा जा सकता है। इंटीरियर डिजाइनर की माने तो गर्मियों में जितने ह

रसोई

देशी नास्‍ते में दम, चुस्‍त रखे हरदम

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भारत विविध्ताओं से भरा देश है। यहां विभिन्न प्रांतों में रहने वाले लोगों जिस तरह बोलचाल, वेशभूषा से अलग-अलग हैं उसी तरह हमारे खान-पान भी विभिन्न-विभिन्न हैं। इन्हीं भिन्नताओं में से एक है हमारा नाश्‍ता। हर प्रदेश का सुबह का नाश्‍ता अलग-अलग है, लेकिन इसमें एक बात सामान्‍य है वह इनमें दिन भर ऊर्जा देने की क्षमता। इसका स्‍वाद भले ही भिन्‍न-भि

बनाइए हींग वाला कच्चे आम का अचार

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बनाइए हींग वाला कच्चे आम का अचार
सामग्री :
500 ग्राम कच्चा आम, एक टी स्पून हल्दी पाउडर, 1/2 टी स्पून हींग पाउडर, 1 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर, 2 टे.स्पून सरसों का तेल, 1-1/2 टे.स्पून नमक।

नारियल वाले चावल

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नारियल वाले चावल

सामग्री :
200 ग्राम चावल धुले हुए
4 बडे चम्मच ताजा कसा हुआ नारियल
2 बडे चम्मच मूंगफली के दाने
1 बडा चम्मच घी तेल
नमक, काली मिर्च स्वादानुसार
पानी 300 मिली.

मसाला भिण्डी

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मसाला भिण्डी

इटालियन वेजिटेबल सूप

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इटालियन वेजिटेबल सूप

सामग्री :
1 गाजर पतले लच्छों में कटी
100 ग्राम पत्ता गोभी पतले लच्छों में कटी
8-10 फ्रांस बीन्स बारीक कटे हुए
1 प्याज स्लाइस कटे
1 तेज पत्ता
4 कप वेजिटेबल स्टॉक
1 कप उबला लोबिया
1/2 कप छोटा पास्ता

बेसन के लड्डू

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बेसन के लड्डू

सामग्री :
1 कप बेसन
1/4 कप सूजी
1 कप पिसी चीनी
1/2 कप घी
1/2 छोटा चम्मच इलायची पाउडर

बनाने की विधि :

सूजी का उत्‍तप्‍पा

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सूजी का उत्‍तप्‍पा

सामग्री

डेढ़ टी-कप सूजी

4 टेबल-स्‍पून ताजा दही

1 टेबुल -स्‍पून तेल

नमक स्‍वादनुसार

मूंग दाल का हलवा

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मूंग दाल का हलवा

सामग्री
100 ग्राम पीली मूंग दाल
100 ग्राम घी
100 ग्राम शक्‍कर
100 ग्राम मावा
आधा टी-स्‍पून इलायची पाउडर
5-6 बादाम कटे हुए

पॉपकॉर्न में हो नमक कम, तो लाइफ हेल्‍दी

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नई दिल्ली। किसी भी सिनेमाघरों या शॉपिंग मॉल्स में पॉपकॉर्न को लोग टाइमपास के लिए ही खाते हैं लेकिन विशेषज्ञों की माने तो अगर इस पॉपकॉर्न का उचित ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो सेहत के लिए बेहतरीन साबित हो सकता है। यह हमारे स्वास्थ्य को चुस्त-दुरुस्त बनाने में खूब मदद करता है। कई शोधों में साबित हुया है कि युवाओं का यह पसन्दीदा टाइमपास पॉपकार्न बुजुर्गों की सेहत पर भ

रिश्‍ते नाते

पिता का साया सिर पर होने से भटकते नहीं हैं बच्‍चे

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मेलबर्न। एक ताजा अध्ययन में पाया गया है कि बेटे के व्यक्तित्व विकास के लिए पिता का साथ बेहद जरूरी है। खासकर किशोरावस्था में जब बच्चे गलत दिशा की ओर जल्दी मुड़ जाते हैं।

अगर ऐसे मौके पर पिता की छत्रछाया बनी रहती है तो बच्चे के जीवन में भटकाव नहीं आता है। लड़कियों पर हालांकि पिता के होने या नहीं होने का असर नहीं देखा गया है।

आज भी जीवनसाथी चुनने में मां ही लेती है निर्णय

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महानगरों में भले ही लिव इन रिलेशनशिप, लव, अफेयर, लव मैरिज का चलन देखने को मिल रहा हो, लेकिन परंपरागत भारतीय समाज में अभी भी जीवनसाथी के चयन में मां ही महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। दुनिया की सबसे बड़ी मैरिज पोर्टल शादी डॉट कॉम के मुताबिक मदर्स डे पर कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि मां ही बच्‍चों के हमसफर को चुनने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभ

अब शादी या प्‍यार नहीं करिअर को महत्व दे रहे हैं युवा

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एक समय वह था कि जब युवा वर्ग के लोग अपने विवाह या प्रेम को अधिक महत्व देते थे, लेकिन आज की युवा पीढ़ी इनके स्थान पर अपने करिअर को अधिक महत्व देने लगी है। इन युवाओं का कहना है कि वर्तमान समय प्रतियोगिता का समय है और इसमें वही युवा सफल हो सकता है जो अपनी समस्त शक्ति एवं क्षमता को एकत्रित कर अपने करिअर में लगा दे। आज के युवक-युवतियां बहुत

बिना शादी बच्‍चे पैदा करने का बढ़ रहा है चलन

अमेरिका और ब्रिटेन में पारंपरिक पारिवारिक ढांचा लगातार बिखर रहा है। अमेरिका में साल 1964 तक जहां 93 फीसदी बच्चे शादीशुदा अभिभावकों की संतान थे, वहीं 2009 आते-आते शादीशुदा मां-बाप के बच्चों की तादाद घटकर 58 फीसदी पर आ गई। यानी 42 फीसदी बच्चे बिना शादी के साथ रह रहे स्‍त्री पुरुष की संतान थे। ब्रिटेन में तो 2009 में जन्म लेने वाले 46 प्रतिशत बच्चे गैर शादीशुदा

पड़ोसी से बनाए मधुर रिश्ते

साकेत में रहनेवाली हिमानी शुक्ला वर्षों से इस इलाके में रह रही हैं लेकिन उन्हें इतना पता नहीं है कि उनके पड़ोस में कौन रहता है। उनके नाम तक नहीं मालूम है, वे लोग क्या करते हैं और कहां के हैं ये तो दूर की बात है । सुबह पति के ऑफिस और बच्चों के स्कूल जाने के बाद हिमानी पूरे दिन अकेली रहती है । अक्सर उन्हें ये अकेलापन खलता भी है लेकिन वह चाह कर भी कुछ नहीं कर पाती है

मम्मी-डैडी बन गए दोस्‍त

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मेरे साथ मेरे मम्मी-पापा बहुत खुलकर बातें करते हैं और बचपन से ही वे बहुत ज्यादा फ्रेण्डली रहे हैं । मेरे घर का माहौल बहुत अच्छा है और घर में किसी बात को लेकर कभी कोई रोक-टोक नहीं रही है और ना ही मेरे या मेरे भाई के ऊपर कभी माता-पिता का किसी तरह का दबाव रहा है । ये कहना है आरकेपुरम सेक्टर-3 में रहनेवाली 21 वर्षीय आशिमा का।

पापा जल्दी न आना...

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नई दिल्‍ली। पापा जो बचपन में हमारा ख्याल रखते हैं। पापा जो युवावस्था में हमें सही मार्ग दिखाते हैं और दुनिया से बचाते हैं । और वही पापा एक दिन हमारे लिए आंख बचाने की 'वस्तु' हो जाते हैं। वस्तु, जी हां 'वस्तु' क्योंकि किसी वस्तु का ही हम उपयोग करते हैं। जिनसे हमें प्यार होता है, उनके लिए हमारे दिल में सम्मान और समर्पण की भावना होती है, लेकिन आधुनिकता की होड़ म

संयुक्त परिवार की डोर हैं दादा-दादी

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भारत में तेजी से एकल परिवार की अवधरणा बढ़ती जा रही है खासकर बड़े शहरों और मेट्रों शहरों। अब तो इसकी आग छोटे शहर और गांवों में भी पफैलाती जा रही है। जहां देखो वहीं एक परिवार अपना पांव पसारते जा रही है। इसकी वजह चाहे बढ़त पारिवारिक दायित्व से बचना हो या पिफर पश्चिम देशी की नकल में आध्ुनिकता की दिखावा। यह हमारे देश और संस्कृति के खिलापफ है। जो मां-बाप बड़े जतन से बाल-बच

मां की जगह दोस्त बनकर समझें बेटियों को

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सविता की बेटी अब बड़ी हो रही है । पहले स्कूल जाती थी तो सरिता को होमवर्क पूरा कराने की चिन्ता सताती थी अब बड़ी हो रही है तो  दस तरह की बातें सरिता के दिमाग में घूमने लगी हैं । मां की चिन्ता तो खैर कभी खत्म ही नहीं होती लेकिन अगर आपकी बेटी किशोर अवस्था में कदम रख रही है तो  लाजमी है कि आप भी अपनी बेटी को लेकर सर्तक हो जाती हैं । उसे घर समय से आने के लिए कह

मेरी मां

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मेरी मां बहुत अच्‍छी है। वह बहुत खूबसूरत है। वह मुझे कभी नहीं मारती। वह मुझे हर मांग को पूरा करती है। मेरे खाने का वह विशेष ध्‍यान रखती है। हमेशा मेरा मनपसंद खाना बनाती है। वह मेरे साथ कैरम, इंटरनेशनल बिजनस और लूडो खेलती है। अगर मैं दुखी हो जाऊं तो वह मुझे मनाती है। वह मुझे दुनिया में सबसे ज्‍यादा प्‍यार करती है। मैं भी अपनी मां को सबसे अधिक प्&zw