धर्म दर्शन

पश्चिम में सेक्‍स आनंद का साधन मात्र है, लेकिन पूर्व में नहीं: ओशो

osho.jpg

ऐसा लगता है कि पश्‍चिम के लिए यह स्‍वीकारना बहुत मुश्‍किल है कि सेक्‍स का बिदा होना आनंद और अनंत का आशीर्वाद की तरह हो सकता है। क्‍योंकि वे मात्र भौतिक शरीर में ही विश्‍वास करते है। किसी भी पल काम तृप्‍ति का आनंद लेने के लिए सेक्‍स एक साधन मात्र है। तुम पर्याप्‍त भाग्‍यशाली हो जो उन लाखों लोगों में शामिल नहीं हो।

ओशो: बुढ़ापे में व्‍यक्ति क्‍यों होता है का‍मुकता से ग्रस्‍त?

OshoWithTea.jpg

यदि लोग अपने सेक्‍स जीवन को आनंदपूर्ण ढंग से जी सके तो बयालीस साल के होत-होत, याद रखो में कह रहा हूं, बयालीस, न कि चौरासी…बयालीस के होते सेक्‍स उन पर से अपनी पकड़ छोड़ना शुरू कर देगा। ऐसे ही जैसे कि चौदह के होते स्‍वयं सेक्‍स आता है और ताकतवर होता है। ऐसे ही कोई बयालीस का होता है सेक्‍स विदा हो जाता है। बूढ़ा व्‍यक्‍ति अधिक प्रे

सेक्‍स आमोद-प्रमोद से पूर्ण होना चाहिए: ओशो

Khajuraho.jpg

सेक्‍स से संबंधित किसी नैतिकता का कोई भविष्‍य नहीं है। सच तो यह है कि सेक्‍स और नैतिकता के संयोजन ने नैतिकता के सारे अतीत को विषैला कर दिया है। नैतिकता इतनी सेक्‍स केंद्रित हो गई कि उसके दूसरे सभी आयाम खो गये—जो अधिक महत्‍वपूर्ण है। असल में सेक्‍स नैतिकता से इतना संबंधित नहीं होना चाहिए।

शिव लिंग की उत्‍पत्ति और महिमा

shivling.jpg

शिवलिंग भगवान शंकर का प्रतीक है। 'शिव' का अर्थ है - 'कल्याणकारी'। 'लिंग' का अर्थ है - 'सृजन'। शंकर के शिवलिंग की जल, दूध, बेलपत्र से पूजा की जाती है। सर्जनहार के रूप में उत्पादक शक्ति के चिन्ह के रूप में लिंग की पूजा होती है। स्कंद पुराण में लिंग का अर्थ लय लगाया गया है। लय ( प्रलय) के समय अग्नि में सब भस्म हो कर शिवलिंग में समा जाता है और सृष्टि के आदि में लिंग

संन्‍यास और गृहस्‍थी का मेल परमात्‍मा पर छोड़: ओशो

osho.jpg

प्‍यारी साधना,
प्रेम। पूछा है तूने: मन स्‍थिति संन्‍यासी की
और परिस्थिति गृहस्‍थी की—इनमें मेल कैसे करें?
मेल तू करना ही नहीं—वह कठिन कार्य प्रभु पर ही छोड़।
संसार और स्‍वयं का भी उसने मेल किया है—शरीर और आत्‍मा का भी।
उसके लिए तो जैसे कहीं द्वंद्व है ही नहीं।

संस्‍कारों ने खत्‍म कर दी योग्‍यता

osho3.jpg

मानव समाज में हर जगह हर व्यक्ति के खिलाफ यह अपराध किया गया है। तुम्हें लगातार संस्कारित किया गया है और कहा गया है कि तुम अपात्र हो। क्योंकि इन संस्कारों के कारण मानवता के अधिकांश हिस्से ने किसी भी साहसिक इच्छा को दबा दिया है । बच्‍चों के माता पिता उन्हें कह रहे थे, 'तुम अयोग्य हो।' उनके शिक्षक उन्हें कह रहे थे, 'तुम अयोग्य हो।' उनके धर्मगुरु उन्हें कह रहे थे,

हमेशा भाग्य को दोष देना उचित नहीं

fenfsui.jpg

`जैसा कर्म करेगा वैसा फल देगा भगवान´ यह सिर्फ गीता का ही ज्ञान नहीं है,  बल्कि जीवन का यथार्थ है जिससे इंकार नहीं किया जा सकता है। कर्म के बल पर ही हम हर उस मुश्किल से बाहर निकल सकते हैं जो हमें अपने जंजीरों से जकड लेता है । कर्म के सहारे ही हम ऊंचाइयों के उस मुकाम पर पहुंच सकते हैं जिसकी हमने कामना की है । हमारे कर्म ही हमारे भाग्य को परिवर्ति

आस्था और अमन का संदेश देता है इस्लाम

islaam3.jpg

इस्‍लाम को लेकर पूरी दुनिया में भ्रम की स्थिति बनी हुई है । हाल ही में अमेरिका के एक चर्च के पादरी ने इस्‍लाम के पवित्र ग्रंथ कुरआन शरीफ को जलाने की बात कह कर पूरी दुनिया में आग लगाने की कोशिश की । अफगानिस्‍तान, पाकिस्‍तान व भारत सहित पूरी दुनिया आतंकवाद के चपेटे में हैा यह एक संयोग है कि ओसामा बिन लादेन सहित अधिकांश आतंकी हमलों को अंजाम द

बुद्ध, बौद्ध और अनुयायी

Buddhism.jpg

पूर्व में भारत और वर्तमान में नेपाल का हिस्सा है लुंबिनी,  जो हिमालय की तराई में बसा एक छोटा सा गांव है जहां महात्मा बुद्ध का जन्म ईसा पूर्व  563 में हुआ था । आज भी हमारे देश की सभ्यता तथा संस्कृति पर बौद्ध धर्म की अमिट छाप है। हिन्दू भी महात्मा बुद्ध को विष्‍णु भगवान का अवतार मानकर उनकी पूजा करते हैं। महात्मा बुद्ध की शिक्षा का सार सत्य, अहिंसा तथा

सिवाए मनुष्‍य के सारा अस्तित्‍व सुखी है

OshoConditioning.jpg

दुख तुम्हारे अहंकार को पोषित करता है और सुख मूलत: निरअहंकार की अवस्था है. वही समस्या है और वही समस्या की जड़, तभी सुखी होना लोगो को बहुत कठिन लगता है. तभी संसार में लाखोँ लोग दुख मेँ ही जीते हैँ... उन्होँने दुख मेँ ही जीने की ठान ली है. यह तुम्हेँ बहुत सूक्ष्म अहंकार  देता है. दुख मेँ तुम सुखी होते हो पर तुम नहीँ होते.