होलिका दहन पर्व के कई मत, मतांतर हैं। इसे मुख्य रूप से हिरण्य कश्यप की बहन होलिका के दहन का दिन माना जाता है, वहीं शास्त्रों में कई तरह के मत दिए गए हैं। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक आठ दिन होलाष्टक के बाद होलिका दहन की परंपरा है। प्राचीन समय से पंरपरा है कि खेत से नव अन्न को यज्ञ हवन किया जाता है, यह परंपरा गांवों में अभी भी प्रचलित है।
आस्था पर मजहब का जोर नहीं चलता। जिस इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी की इबादत कबूल नहीं है, जहां देश की वंदना-'वंदे मातरम' को भी इस्लाम का अपमान मान लिया जाता है, वहां सैकड़ों ऐसे मुस्लिम परिवार हैं जो छठ माई के प्रति न केवल आस्था रखते हैं, बल्कि छठ का व्रत भी किसी हिंदू परिवार के समान ही सारे अनुष्ठानों को निभाते हुए रखते हैं। बिहार
सूर्यषष्ठी अर्थात छठ की पूजा अब बिहार से निकलकर दुनिया के कोने-कोने में पहुंच चुकी है। जहां-जहां बिहारी बसे हैं, अपने साथ अपने इस पारंपरिक त्यौहार को भी ले गए हैं। आस्था और श्रद्धा के इस महापर्व से बड़ा प्रकृति पूजा का दूसरा उदाहरण इतिहास में नहीं मिलता है।
नई दिल्ली। दीपावली में नकली खोया और दूध वाली मिठाई न केवल सामान्य व्यक्ति को, बल्कि गर्भवती महिलाओं व गर्भ में पल रहे बच्चों को अधिक प्रभावित कर सकती है। यही नहीं, पटाखे का धूम-धड़ाका और उससे फैलने वाला वायु व ध्वनि प्रदूषण गर्भवती महिलाओं के दिल की धड़कन बढ़ा सकता है, भ्रूण के विकास को रोक सकता है और गर्भ में पल रहे बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन से महरूम कर सकता है।
दिवाली में पटाखों के शोर से ध्वनि व उससे फैले बारूद भरे धुएं से वायु प्रदूषण जबरदस्त होता है। वायु प्रदूषण से अस्थमा के मरीजों की हालत बेहद खराब हो जाती है और ध्वनि प्रदूषण से हमारे-आपके सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। हमारे सुनने की क्षमता कम पड़ती जाती है।
नई दिल्ली। पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए पत्नी के करवाचौथ का व्रत रखने की पुरानी परंपरा अब आधुनिकता के रंग में रंग चुकी है और बाजार के बढ़ते प्रभाव ने विभिन्न पैकेजों की पेशकश के बीच पूजा की थाली से लेकर चांद को देखने वाली छलनी तक को 'डिजाइनर' बना दिया है।
1. शैल पुत्री- माँ दुर्गा का प्रथम रूप है शैल पुत्री। पर्वतराज हिमालय के यहाँ जन्म होने से इन्हें शैल पुत्री कहा जाता है। नवरात्रि की प्रथम तिथि को शैल पुत्री की पूजा की जाती है। इनके पूजन से भक्त सदा धन-धान्य से परिपूर्ण पूर्ण रहते हैं।
नवरात्रि के नौवों दिन अलग-अलग भोग लगाने से घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है। परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य ठीक रहता है और शरीर निरोग रहता है। बुद्धि, विद्या, धन एवं सभी इच्छित फल की प्राप्ति होती है। मां दुर्गा का आशीष अपने भक्तों पर बना रहता है। मां दुर्गा की पूजा मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाती है और सभी का कल्याण करती है।
शारदीय नवरात्रि 28 सितंबर से शुरू हो रही है। प्रतिपदा तिथि दोपहर 12.45 तक रहेगी। इसके चलते सर्वार्थ सिद्धि योग स्थापना के दिन दोपहर 1.37 तक रहेगा। वर्षों बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब चंद्र प्रधान हस्त नक्षत्र में नवरात्रि का शुभारंभ होगा। यह भक्तों के लिए उत्तम और फलकारी संयोग का सचेतक है।
गुग्गा नवमी पर विशेष। श्रावण शुक्ल पंचमी को जहां हम `नागपंचमी´ मनाते हैं और नागों की पूजा करते हैं वहीं श्रावण पूर्णिमा के बाद आने वाले नवमी को `गुग्गा नवमी´ मनाते है। लोगों में ऐसा विश्वास है कि गुग्गा देवता की पूजा करने से वे सांपों से हमारी रक्षा करते हैं। इसलिए गुग्गा देवता को सांपों का देवता भी माना जाता हैा