ऐसा लगता है कि पश्चिम के लिए यह स्वीकारना बहुत मुश्किल है कि सेक्स का बिदा होना आनंद और अनंत का आशीर्वाद की तरह हो सकता है। क्योंकि वे मात्र भौतिक शरीर में ही विश्वास करते है। किसी भी पल काम तृप्ति का आनंद लेने के लिए सेक्स एक साधन मात्र है। तुम पर्याप्त भाग्यशाली हो जो उन लाखों लोगों में शामिल नहीं हो।
यदि लोग अपने सेक्स जीवन को आनंदपूर्ण ढंग से जी सके तो बयालीस साल के होत-होत, याद रखो में कह रहा हूं, बयालीस, न कि चौरासी…बयालीस के होते सेक्स उन पर से अपनी पकड़ छोड़ना शुरू कर देगा। ऐसे ही जैसे कि चौदह के होते स्वयं सेक्स आता है और ताकतवर होता है। ऐसे ही कोई बयालीस का होता है सेक्स विदा हो जाता है। बूढ़ा व्यक्ति अधिक प्रे
सेक्स से संबंधित किसी नैतिकता का कोई भविष्य नहीं है। सच तो यह है कि सेक्स और नैतिकता के संयोजन ने नैतिकता के सारे अतीत को विषैला कर दिया है। नैतिकता इतनी सेक्स केंद्रित हो गई कि उसके दूसरे सभी आयाम खो गये—जो अधिक महत्वपूर्ण है। असल में सेक्स नैतिकता से इतना संबंधित नहीं होना चाहिए।
शिवलिंग भगवान शंकर का प्रतीक है। 'शिव' का अर्थ है - 'कल्याणकारी'। 'लिंग' का अर्थ है - 'सृजन'। शंकर के शिवलिंग की जल, दूध, बेलपत्र से पूजा की जाती है। सर्जनहार के रूप में उत्पादक शक्ति के चिन्ह के रूप में लिंग की पूजा होती है। स्कंद पुराण में लिंग का अर्थ लय लगाया गया है। लय ( प्रलय) के समय अग्नि में सब भस्म हो कर शिवलिंग में समा जाता है और सृष्टि के आदि में लिंग
प्यारी साधना,
प्रेम। पूछा है तूने: मन स्थिति संन्यासी की
और परिस्थिति गृहस्थी की—इनमें मेल कैसे करें?
मेल तू करना ही नहीं—वह कठिन कार्य प्रभु पर ही छोड़।
संसार और स्वयं का भी उसने मेल किया है—शरीर और आत्मा का भी।
उसके लिए तो जैसे कहीं द्वंद्व है ही नहीं।
मानव समाज में हर जगह हर व्यक्ति के खिलाफ यह अपराध किया गया है। तुम्हें लगातार संस्कारित किया गया है और कहा गया है कि तुम अपात्र हो। क्योंकि इन संस्कारों के कारण मानवता के अधिकांश हिस्से ने किसी भी साहसिक इच्छा को दबा दिया है । बच्चों के माता पिता उन्हें कह रहे थे, 'तुम अयोग्य हो।' उनके शिक्षक उन्हें कह रहे थे, 'तुम अयोग्य हो।' उनके धर्मगुरु उन्हें कह रहे थे,
`जैसा कर्म करेगा वैसा फल देगा भगवान´ यह सिर्फ गीता का ही ज्ञान नहीं है, बल्कि जीवन का यथार्थ है जिससे इंकार नहीं किया जा सकता है। कर्म के बल पर ही हम हर उस मुश्किल से बाहर निकल सकते हैं जो हमें अपने जंजीरों से जकड लेता है । कर्म के सहारे ही हम ऊंचाइयों के उस मुकाम पर पहुंच सकते हैं जिसकी हमने कामना की है । हमारे कर्म ही हमारे भाग्य को परिवर्ति
इस्लाम को लेकर पूरी दुनिया में भ्रम की स्थिति बनी हुई है । हाल ही में अमेरिका के एक चर्च के पादरी ने इस्लाम के पवित्र ग्रंथ कुरआन शरीफ को जलाने की बात कह कर पूरी दुनिया में आग लगाने की कोशिश की । अफगानिस्तान, पाकिस्तान व भारत सहित पूरी दुनिया आतंकवाद के चपेटे में हैा यह एक संयोग है कि ओसामा बिन लादेन सहित अधिकांश आतंकी हमलों को अंजाम द
पूर्व में भारत और वर्तमान में नेपाल का हिस्सा है लुंबिनी, जो हिमालय की तराई में बसा एक छोटा सा गांव है जहां महात्मा बुद्ध का जन्म ईसा पूर्व 563 में हुआ था । आज भी हमारे देश की सभ्यता तथा संस्कृति पर बौद्ध धर्म की अमिट छाप है। हिन्दू भी महात्मा बुद्ध को विष्णु भगवान का अवतार मानकर उनकी पूजा करते हैं। महात्मा बुद्ध की शिक्षा का सार सत्य, अहिंसा तथा
दुख तुम्हारे अहंकार को पोषित करता है और सुख मूलत: निरअहंकार की अवस्था है. वही समस्या है और वही समस्या की जड़, तभी सुखी होना लोगो को बहुत कठिन लगता है. तभी संसार में लाखोँ लोग दुख मेँ ही जीते हैँ... उन्होँने दुख मेँ ही जीने की ठान ली है. यह तुम्हेँ बहुत सूक्ष्म अहंकार देता है. दुख मेँ तुम सुखी होते हो पर तुम नहीँ होते.
होलिका दहन पर्व के कई मत, मतांतर हैं। इसे मुख्य रूप से हिरण्य कश्यप की बहन होलिका के दहन का दिन माना जाता है, वहीं शास्त्रों में कई तरह के मत दिए गए हैं। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक आठ दिन होलाष्टक के बाद होलिका दहन की परंपरा है। प्राचीन समय से पंरपरा है कि खेत से नव अन्न को यज्ञ हवन किया जाता है, यह परंपरा गांवों में अभी भी प्रचलित है।
आस्था पर मजहब का जोर नहीं चलता। जिस इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी की इबादत कबूल नहीं है, जहां देश की वंदना-'वंदे मातरम' को भी इस्लाम का अपमान मान लिया जाता है, वहां सैकड़ों ऐसे मुस्लिम परिवार हैं जो छठ माई के प्रति न केवल आस्था रखते हैं, बल्कि छठ का व्रत भी किसी हिंदू परिवार के समान ही सारे अनुष्ठानों को निभाते हुए रखते हैं। बिहार
सूर्यषष्ठी अर्थात छठ की पूजा अब बिहार से निकलकर दुनिया के कोने-कोने में पहुंच चुकी है। जहां-जहां बिहारी बसे हैं, अपने साथ अपने इस पारंपरिक त्यौहार को भी ले गए हैं। आस्था और श्रद्धा के इस महापर्व से बड़ा प्रकृति पूजा का दूसरा उदाहरण इतिहास में नहीं मिलता है।
नई दिल्ली। दीपावली में नकली खोया और दूध वाली मिठाई न केवल सामान्य व्यक्ति को, बल्कि गर्भवती महिलाओं व गर्भ में पल रहे बच्चों को अधिक प्रभावित कर सकती है। यही नहीं, पटाखे का धूम-धड़ाका और उससे फैलने वाला वायु व ध्वनि प्रदूषण गर्भवती महिलाओं के दिल की धड़कन बढ़ा सकता है, भ्रूण के विकास को रोक सकता है और गर्भ में पल रहे बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन से महरूम कर सकता है।
दिवाली में पटाखों के शोर से ध्वनि व उससे फैले बारूद भरे धुएं से वायु प्रदूषण जबरदस्त होता है। वायु प्रदूषण से अस्थमा के मरीजों की हालत बेहद खराब हो जाती है और ध्वनि प्रदूषण से हमारे-आपके सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। हमारे सुनने की क्षमता कम पड़ती जाती है।
नई दिल्ली। पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए पत्नी के करवाचौथ का व्रत रखने की पुरानी परंपरा अब आधुनिकता के रंग में रंग चुकी है और बाजार के बढ़ते प्रभाव ने विभिन्न पैकेजों की पेशकश के बीच पूजा की थाली से लेकर चांद को देखने वाली छलनी तक को 'डिजाइनर' बना दिया है।
1. शैल पुत्री- माँ दुर्गा का प्रथम रूप है शैल पुत्री। पर्वतराज हिमालय के यहाँ जन्म होने से इन्हें शैल पुत्री कहा जाता है। नवरात्रि की प्रथम तिथि को शैल पुत्री की पूजा की जाती है। इनके पूजन से भक्त सदा धन-धान्य से परिपूर्ण पूर्ण रहते हैं।
नवरात्रि के नौवों दिन अलग-अलग भोग लगाने से घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है। परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य ठीक रहता है और शरीर निरोग रहता है। बुद्धि, विद्या, धन एवं सभी इच्छित फल की प्राप्ति होती है। मां दुर्गा का आशीष अपने भक्तों पर बना रहता है। मां दुर्गा की पूजा मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाती है और सभी का कल्याण करती है।
शारदीय नवरात्रि 28 सितंबर से शुरू हो रही है। प्रतिपदा तिथि दोपहर 12.45 तक रहेगी। इसके चलते सर्वार्थ सिद्धि योग स्थापना के दिन दोपहर 1.37 तक रहेगा। वर्षों बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब चंद्र प्रधान हस्त नक्षत्र में नवरात्रि का शुभारंभ होगा। यह भक्तों के लिए उत्तम और फलकारी संयोग का सचेतक है।
गुग्गा नवमी पर विशेष। श्रावण शुक्ल पंचमी को जहां हम `नागपंचमी´ मनाते हैं और नागों की पूजा करते हैं वहीं श्रावण पूर्णिमा के बाद आने वाले नवमी को `गुग्गा नवमी´ मनाते है। लोगों में ऐसा विश्वास है कि गुग्गा देवता की पूजा करने से वे सांपों से हमारी रक्षा करते हैं। इसलिए गुग्गा देवता को सांपों का देवता भी माना जाता हैा
यदि आपका जन्म अप्रैल महीने में हुआ है तो अंकशास्त्र के अनुसार, आप जिददी, नाटकबाज, रोमांटिक, सेक्स को लेकर उत्साही, जुनूनी, गुस्सैल होते हैं। इनका गुस्से पर नियंत्रण नहीं रहता, लेकिन इनमें सेंस ऑफ हृयूमर भी भरपूर होता है, जिसका इस्तेमाल ये प्रेम संबंध विकसित करने के लिए बखूबी करते हैं।
मार्च महीने में पैदा हुआ व्यक्ति जितना दृढ होता है, उतना ही दुर्बल भी। दृढता इनमें ऐसी होती है कि यदि किसी लक्ष्य को साध लें तो उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। और दुर्बलता का आलम यह है कि इन पर भावनाएं जल्द हावी हो जाती है। भोग विलास, मादक पदार्थों का सेवन, झूठे लोगों से मित्रता, बहुत अधिक बातूनी जैसे दुर्गण इन्हें घेर लेते हैं।
* मेष : इस महीने विद्यार्थियों व नौकरी की तलाश करने वाले युवक-युवतियों के लिए अच्छा योग है। परीक्षा, प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी। नौकरी की तलाश पूरी होगी और सही व्यवसाय के चयन में मदद मिलेगी। सेना के क्षेत्र में नौकरी की तलाश कर रहे लोगों की सफलता का विशेष योग है। इस माह या
पुरानी कहावत है कि नाम में क्या रखा है। लेकिन सच बताऊं नाम में ही बहुत कुछ रखा है। नाम कालांतर में आपके व्यक्तित्व का दर्पण हो जाता है। नाम का असर आपके व्यक्त्वि पर जबरदस्त पड़ता है और धीरे-धीरे आपका पूरा व्यक्तित्व उसमें लिपटता चला जाता है। अंग्रेसी के अल्फाबेट ए से लेकर जेड तक का अपना प्रभाव है। हम यहां आपकी नाम राशि, प्र
* मेष-(चु, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) राशि का स्वामी मंगल इस वर्ष खुसियों की बौछार लेकर आने का संकेत कर रहा है। साथ ही आपको अपने प्रिय से प्रेम तो करते रहना चाहिए लेकिन स्थाई जीवनसाथी बनाने में जल्दी बाजी नहीं करनी चाहिए क्योंकि 15 मई तक आपकी राशि में शनि की नीच दृष्टि है। इस
फरवरी माह में जन्म लेने वाले स्वभाव से थोड़े अलग, थोड़े विचित्र होते हैं। इनमें आकर्षण शक्ति तो होती ही है, अंतर्बोध और दूसरों की बात को ग्रहण करने की क्षमता भी भरपूर होती है। ये बेहद संवेदनशील होते हैं, जिस कारण दूसरों की बातों से तुरंत तिलमिला भी जाते हैं।
* मेष :
इस महीने व्यस्तता काफी रहेगी। नई योजनाओं पर काम करने का अवसर मिलेगा। आपके व्यवहार के दूसरे कायल रहेंगे। नए लोगों से संबंध बनेगा।
प्रत्येक वर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। विद्या की देवी सरस्वती की इस दिन पूजा का विधान है।
* मेष : जून माह तक उत्तम स्वास्थ्य पर वजन में वृद्धि । ऐसे में व्यायाम जरूरी । मांसाहार व मद्यपान से जून तक रक्तचाप में वृद्धि संभव । मार्च से अगस्त तथा सितंबर से वर्ष के अंत तक मधुमेह, नेत्र रोग व हारमोंस की प्रक्रिया में परिवर्तन । अत: मीठा खाने, वजन बढने, अत्यिअधिक भोग-विलास,
* मेष राशि:-सितारों की चाल प्रतिकूल होगी तथा मानसिक तनाव बढेगा। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहे तथा दैनिक दिनचर्या को नियमित रखें। कार्य संबंधी उलझने होगी तथा आपके अपने ही हानि का प्रयास करेंगे।
पुट्टापर्थी के सत्य साईं का निधन हो गया है। रविवार 24 अप्रैल की सुबह सात बजकर 40 मिनट पर उन्होंने अपना शरीर छोड़ दिया। 85 वर्षीय सत्य साईं को दिल और सांस संबंधी समस्याओं के बाद 28 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। पिछले 28 दिनों से सत्य साईं की ज
रजनीशचंद्र मोहन (११ दिसम्बर १९३१ - १९ जनवरी १९९०), जिन्हें हम सब ओशो के नाम से जानते हैं। उनकी समाधि पर खुदा है, ओशो: ''जिनका न कभी जन्म हुआ और न म़त्यु। 11दिसंबर 1931 से 19 जनवरी 1990 तक इस पृथ्वी ग्रह की यात्रा पर आए। ''
महर्षि रमण का जन्म सन् 1879 में तमिलनाडु के मदुरै से 30 मील दूर एक छोटे से गांव तिरूचल्ली में हुआ था। उनके बचपन का नाम वेंकटरमण था। उनके पिता का नाम सुंदरम अय्यर व मां का नाम अलगम्माल था। दोनों एक आदर्श दम्पति और भगवान के बड़े भक्त थे।
बचपन में आलसी थे रमण
भारत की धरती सदा से ऋषि, मुनियों, तपस्यिों और सद्गुरुओं की स्थली रही है। यह वही धरती है जहां न केवल पूरे विश्व को शान्ति का पाठ पढ़ाने महात्मा बुद्ध, महावीर जैन और गुरु नानक का जन्म हुआ, बल्कि राम और कृष्ण के रूप में स्वयं भगवान विष्णु ने अवतरित लेकर इस धरती को धन्य किया है और अन्य सभी देवता भी यहां जन्म लेने को लालायित रहते हैं। ऐसे ही पूरे विश्व