सेक्स से संबंधित किसी नैतिकता का कोई भविष्य नहीं है। सच तो यह है कि सेक्स और नैतिकता के संयोजन ने नैतिकता के सारे अतीत को विषैला कर दिया है। नैतिकता इतनी सेक्स केंद्रित हो गई कि उसके दूसरे सभी आयाम खो गये—जो अधिक महत्वपूर्ण है। असल में सेक्स नैतिकता से इतना संबंधित नहीं होना चाहिए।
आचार्य वात्स्यायन ने प्रेम के आवेग में स्त्री-पुरुष द्वारा एक-दूसरे को नोंचने-खसोटने और दांतों से काटने के विधान की भी चर्चा की है। आधुनिक भाषा में कहें तो संभोग से पहले फोर प्ले में नाखुन, जीभ और दांतों की मुख्य भूमिका होती है। अधिकांश दंपत्ति या प्रेमी-प्रमिका को न for play की सही जानकारी होती है और न वह इसका उपयोग करना जानते हैं। इनके
एक सर्वेक्षण के मुताबिक सेक्स की कल्पना करते समय भी महिलाएं अपने वास्तविक पार्टनर को ही ध्यान में रखती हैं। ज्यादातर महिलाएं अपनी सेक्स कल्पना भी उस व्यक्ति के साथ करती हैं, जो फिलहाल उनका यौन साथी है और जिसके साथ वास्तव में वे सेक्स लाइफ का मजा ले रही हैं।
आचार्य वात्स्यायन ने कामसूत्र में नखक्षेद अर्थात संभोग के दौरान नाखुनों से खरोंचने और इसमें निहित उसकी उद्दाम काम भावना का वर्णन किया है। वात्स्यान का मत है कि काम वासना जब उफान पर होता है तो स्त्री-पुरुष उत्तेजनावश एक-दूसरे को नोचने-खसोटने से बाज नहीं आते। स्त्री की उत्तेजना और उसका लज्जाजनक स्वभाग उनके नाखुनों क
संभोग में कंडोम का उपयोग न केवल अनचाहे गर्भ से मुक्ति देता है, बल्कि एचआईवी/एड्स और अन्य यौन संचरित रोगों से भी बचाता है। वैसे तो बाजार में महिला कंडोम भी आ चुका है, लेकिन अभी भी इसका प्रचलन बहुत अधिक नहीं बढ़ा है, जबकि Female Condom संभोग के आठ घंटे पहले लगाया जा सकता है, जिससे यौ
संभोग में सीधे प्रवेश की जगह दंपत्तियों के एक-दूसरे को चूमना, सहलाना और छेड़छाड़ करने से प्यार प्रगाढ़ होता है। फिर संभोग केवल एक वासना नहीं होकर, प्यार बन जाता है। कामसूत्र में प्यार में गहरे उतरने से पहले चुंबन की सलाह दी गई हैा ऊपरी होंठ व अधर(निचले होंठ) के चुंबन में एक नशा सा छाता जाता है और स्त्री पुरुष प्यार में सरोबार होते चले जात
यौन क्रीड़ा में अधर (नीचे के होंठ) का चुंबन यौन उत्तेजना जगाने में सहायक है तो ऊपरी होठों का चुंबन उत्तेजना को बढ़ाने और यौन क्रिया को तीव्रता प्रदान करने में सहयोगी साबित होता है। वैसे जानकारी के अभाव में कम स्त्री पुरुष ही एक दूसरे के ऊपरी होठ का रसास्वादन कर पाते हैं। वास्तव में ऊपरी होठों का चुंबन स्त्री पुरुष को इस कदर उत्त
स्त्री पुरुष जब संभोग के आनंद से सराबोर होने के क्षण में होते हैं तो उस क्षण में नाखुन गड़ाने, चुंबनों की बौछार करने आदि से वे नहीं हिचकते। यह सब स्वत: चरमोत्कर्ष के निकट जाने के क्रम में होता चला जाता है। वात्स्यायन का मत है कि चुंबन, नखछेद, दशनछेद, प्रहणन और संभोग के समय पुरुष लिंग और योनि से घर्षण की वजह से मुंह से निकलने वाले सीत्&zwj
आचार्य वात्स्यायन ने कामसूत्र की रचना इसलिए की थी ताकि गृहस्थी से अनजान स्त्री-पुरुष इसके हर पक्ष को समझ सकें और इसका ज्ञान व प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत ही इसमें प्रवेश करें। इससे तनाव से मुक्त एक स्वस्थ्य गृहस्थी की रचना हो सकती है। लेकिन आजकल जिस तरह से पैसे के लेने-देन (देहज प्रथा), स्टेटस(पैसे वालों
यह सेक्स का आनंददायक आसन है। इसमें कम जगह होने पर भी बेहतर सेक्स किया जा सकता है। सेक्स की तीव्र इच्छा मन में जग रही हो, बिस्तर उपलब्ध न हो और प्रतीक्षा करने का जरा भी मन नहीं कर रहा हो तो यह एक आनंद से भरा आसन है। इसमें कल्पना के स्तर तक आनंद की प्राप्ति होती है, क्योंकि पुरुष लिंग स्त्री योनि में प्रवेश कर ऊपर क