कामसूत्र

सेक्‍स आमोद-प्रमोद से पूर्ण होना चाहिए: ओशो

Khajuraho.jpg

सेक्‍स से संबंधित किसी नैतिकता का कोई भविष्‍य नहीं है। सच तो यह है कि सेक्‍स और नैतिकता के संयोजन ने नैतिकता के सारे अतीत को विषैला कर दिया है। नैतिकता इतनी सेक्‍स केंद्रित हो गई कि उसके दूसरे सभी आयाम खो गये—जो अधिक महत्‍वपूर्ण है। असल में सेक्‍स नैतिकता से इतना संबंधित नहीं होना चाहिए।

संभोग में उतरने से पहले फोर प्‍ले में करें दंतक्षत का प्रयोग

LoveTeethBite.jpg

आचार्य वात्‍स्‍यायन ने प्रेम के आवेग में स्‍त्री-पुरुष द्वारा एक-दूसरे को नोंचने-खसोटने और दांतों से काटने के विधान की भी चर्चा की है। आधुनिक भाषा में कहें तो संभोग से पहले फोर प्‍ले में नाखुन, जीभ और दांतों की मुख्‍य भूमिका होती है। अधिकांश दंपत्ति या प्रेमी-प्रमिका को न for play की सही जानकारी होती है और न वह इसका उपयोग करना जानते हैं। इनके

कल्पना में भी महिलाएं अपने साथी के साथ ही पसंद करती है सेक्स करना

SexualFantacy.jpg

एक सर्वेक्षण के मुताबिक सेक्स की कल्पना करते समय भी महिलाएं अपने वास्तविक पार्टनर को ही ध्यान में रखती हैं। ज्यादातर महिलाएं अपनी सेक्स कल्पना भी उस व्यक्ति के साथ करती हैं, जो फिलहाल उनका यौन साथी है और जिसके साथ वास्तव में वे सेक्स लाइफ का मजा ले रही हैं।

संभोग के दौरान नाखुनों का खरोंच भी बहुत कुछ कहता है

sextipsorgasm.jpg

आचार्य वात्‍स्‍यायन ने कामसूत्र में नखक्षेद अर्थात संभोग के दौरान नाखुनों से खरोंचने और इसमें निहित उसकी उद्दाम काम भावना का वर्णन किया है। वात्‍स्‍यान का मत है कि काम वासना जब उफान पर होता है तो स्‍त्री-पुरुष उत्‍तेजनावश एक-दूसरे को नोचने-खसोटने से बाज नहीं आते। स्‍त्री की उत्‍तेजना और उसका लज्‍जाजनक स्‍वभाग उनके नाखुनों क

महिला कंडोम: संभोग की अनुभूति के साथ अनचाहे गर्भ व यौन रोग से बचाव

FemaleCondom.jpg

संभोग में कंडोम का उपयोग न केवल अनचाहे गर्भ से मुक्ति देता है, बल्कि एचआईवी/एड्स और अन्‍य यौन संचरित रोगों से भी बचाता है। वैसे तो बाजार में महिला कंडोम भी आ चुका है, लेकिन अभी भी इसका प्रचलन बहुत अधिक नहीं बढ़ा है, जबकि Female Condom संभोग के आठ घंटे पहले लगाया जा सकता है, जिससे यौ

संभोग में सीधे प्रवेश की जगह करें चुंबन से शुरुआत

indiancoupplewithlove.jpg

संभोग में सीधे प्रवेश की जगह दंपत्तियों के एक-दूसरे को चूमना, सहलाना और छेड़छाड़ करने से प्‍यार प्रगाढ़ होता है। फिर संभोग केवल एक वासना नहीं होकर, प्‍यार बन जाता है। कामसूत्र में प्‍यार में गहरे उतरने से पहले चुंबन की सलाह दी गई हैा ऊपरी होंठ व अधर(निचले होंठ) के चुंबन में एक नशा सा छाता जाता है और स्‍त्री पुरुष प्‍यार में सरोबार होते चले जात

यौन‍ क्रिया को तीव्र बनाता है ऊपरी होठों का चुंबन

kiss6.jpg

यौन क्रीड़ा में अधर (नीचे के होंठ) का चुंबन यौन उत्‍तेजना जगाने में सहायक है तो ऊपरी होठों का चुंबन उत्‍तेजना को बढ़ाने और यौन क्रिया को तीव्रता प्रदान करने में सहयोगी साबित होता है। वैसे जानकारी के अभाव में कम स्‍त्री पुरुष ही एक दूसरे के ऊपरी होठ का रसास्‍वादन कर पाते हैं। वास्‍तव में ऊपरी होठों का चुंबन स्‍त्री पुरुष को इस कदर उत्‍त

कामसूत्र के अनुसार खेलें प्‍यार में चुंबन का जुआ

MahiGill.jpg

स्‍त्री पुरुष जब संभोग के आनंद से सराबोर होने के क्षण में होते हैं तो उस क्षण में नाखुन गड़ाने, चुंबनों की बौछार करने आदि से वे नहीं हिचकते। यह सब स्‍वत: चरमोत्‍कर्ष के निकट जाने के क्रम में होता चला जाता है। वात्‍स्‍यायन का मत है कि चुंबन, नखछेद, दशनछेद, प्रहणन और संभोग के समय पुरुष लिंग और योनि से घर्षण की वजह से मुंह से निकलने वाले सीत्&zwj

कामसूत्र के मुताबिक स्त्रियों के लिए 64 कलाएं

kamsutra.jpg

आचार्य वात्‍स्‍यायन ने कामसूत्र की रचना इसलिए की थी ताकि गृहस्‍थी से अनजान स्‍त्री-पुरुष इसके हर पक्ष को समझ सकें और इसका ज्ञान व प्रशिक्षण प्राप्‍त करने के उपरांत ही इसमें प्रवेश करें। इससे तनाव से मुक्‍त एक स्‍वस्‍थ्‍य गृहस्‍थी की रचना हो सकती है। लेकिन आजकल जिस तरह से पैसे के लेने-देन (देहज प्रथा), स्‍टेटस(पैसे वालों

खड़े होकर संभोग से मिलेगी नई अनुभूति

Newelyweaded.jpg

यह सेक्‍स का आनंददायक आसन है। इसमें कम जगह होने पर भी बेहतर सेक्‍स किया जा सकता है। सेक्‍स की तीव्र इच्‍छा मन में जग रही हो, बिस्‍तर उपलब्‍ध न हो और प्रतीक्षा करने का जरा भी मन नहीं कर रहा हो तो यह एक आनंद से भरा आसन है। इसमें कल्‍पना के स्‍तर तक आनंद की प्राप्ति होती है, क्‍योंकि पुरुष लिंग स्‍त्री योनि में प्रवेश कर ऊपर क